लगभग एक वर्ष से तहसील और पटवारी कार्यालय के चक्कर काट रहा किसान, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान*
रिपोर्टर रोहित वर्मा
लोकेशन खरोरा
लगभग एक वर्ष से तहसील और पटवारी कार्यालय के चक्कर काट रहा किसान, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान
खरोरा
भरूवाडीह खुर्द (रायपुर ग्रामीण)। शासन-प्रशासन द्वारा किसानों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई किसानों को आज भी अपने मूलभूत राजस्व दस्तावेज प्राप्त करने के लिए महीनों नहीं बल्कि वर्षों तक भटकना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला ग्राम भरूवाडीह खुर्द के किसान ईश्वर वर्मा का सामने आया है, जो पिछले लगभग एक वर्ष से अपनी भूमि से संबंधित बी-1, खसरा एवं नक्शा ऑनलाइन रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं होने की समस्या को लेकर लगातार राजस्व विभाग के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
किसान ईश्वर वर्मा के अनुसार उनकी भूमि का रिकॉर्ड ऑनलाइन पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रहा है, जिसके कारण उन्हें भूमि संबंधी विभिन्न कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। समस्या के समाधान के लिए उन्होंने कई बार संबंधित पटवारी से संपर्क किया, लेकिन उन्हें तहसील कार्यालय जाने की सलाह दी गई। जब वे तहसील कार्यालय पहुंचे तो वहां से पुनः पटवारी के पास भेज दिया गया। इस प्रकार किसान को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक भटकाया जा रहा है, लेकिन आज तक उसकी समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
किसान ने बताया कि लगातार परेशानी और अधिकारियों की उदासीनता से तंग आकर उन्होंने एसडीएम कार्यालय में भी अपनी शिकायत दर्ज कराई। वहां भी उन्हें कोई स्पष्ट समाधान नहीं मिला और पुनः पटवारी से संपर्क करने की बात कही गई। इससे किसान की परेशानी और बढ़ गई है। उनका कहना है कि जब सभी अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, तो आखिर आम किसान अपनी समस्या लेकर कहां जाए।
इतना ही नहीं, किसान ईश्वर वर्मा ने अपनी समस्या के निराकरण के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई थी, ताकि उच्च स्तर से मामले का संज्ञान लिया जा सके। लेकिन शिकायत दर्ज होने के बाद भी आज तक समस्या का निराकरण नहीं हो पाया है। इससे शासन की शिकायत निवारण व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एक किसान को अपने ही जमीन के दस्तावेज प्राप्त करने के लिए एक वर्ष तक भटकना पड़ रहा है, तो यह राजस्व व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। किसानों को समय पर भूमि संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने से उन्हें बैंक ऋण, फसल बीमा, नामांतरण, सीमांकन तथा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी कठिनाई होती है।
ग्रामीणों एवं किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए तथा किसान ईश्वर वर्मा की समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही यह भी मांग की गई है कि भविष्य में किसी अन्य किसान को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए राजस्व विभाग में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
"एक किसान यदि अपनी ही जमीन के दस्तावेज प्राप्त करने के लिए एक साल तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर विफलता है। प्रशासन को तत्काल संज्ञान लेकर किसान की समस्या का समाधान करना चाहिए।"

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