परचून परिवहन व्यवसाय में दबाव की व्यवस्था मंजूर नहीं, पहले की तरह स्वतंत्र रूप से चलेगा व्यापार


परचून परिवहन व्यवसाय में दबाव की व्यवस्था मंजूर नहीं, पहले की तरह स्वतंत्र रूप से चलेगा व्यापार : छत्तीसगढ़ परचून परिवहन संघ और राजधानी गुड्स ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर एसोसिएशन






 *ब्लैकलिस्ट गाड़ियों को तत्काल रिलीज करने की मांग, ट्रांसपोर्टरों ने कहा—एकजुटता से पीछे नहीं हटेंगे* 


प्रदेश के दो सबसे बड़े एसोसिएशन *छत्तीसगढ़ परचून परिवहन संघ और राजधानी गुड्स ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर एसोसिएशन* ने BPS बस्तर परिवहन संघ की व्यवस्था को लेकर स्पष्ट किया है कि परचून ट्रांसपोर्ट का व्यापार स्वतंत्र है और स्वतंत्र ही रहेगा। ट्रांसपोर्टर जिस तरह पहले से अपना व्यवसाय करते आ रहे हैं, उसी तरह आगे भी बिना किसी अनावश्यक दबाव के परिवहन का काम करना चाहते हैं।


 *एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री स्वरूप चोपड़ा जी* ने कहा कि ट्रांसपोर्टरों की गाड़ियों को ब्लैकलिस्ट करना और सीरियल नंबर सहित अलग-अलग प्रक्रियाओं के नाम पर दबाव बनाना उचित नहीं है। हमारा स्पष्ट कहना है कि हमारे सदस्यों की ब्लैकलिस्ट की गई गाड़ियों को तत्काल रिलीज किया जाए और परिवहन व्यवस्था को पहले की तरह सामान्य किया जाए। ट्रांसपोर्टर अपना व्यापार शांतिपूर्ण तरीके से करना चाहते हैं, लेकिन अपने साथियों के साथ अन्याय होने पर चुप नहीं बैठेंगे।


छत्तीसगढ़ परचून परिवहन संघ के अध्यक्ष श्री आसिफ मेमन जी ने कहा कि जो बस्तर के परचून ट्रांसपोर्टर्स के साथ हुआ है वो सरासर गलत है, हम इसका विरोध करते है। परचून ट्रांसपोर्ट व्यापार किसी ट्रांसपोर्ट संस्था के अधीन हो कर काम नहीं कर सकता, इससे बस्तर क्षेत्र के सभी समान अनाज, मनिहारी,हार्डवेयर इत्यादि सामान का भाव बढ़ जाएगा और मार्केट में महंगाई आजाएगी।


 *एसोसिएशन के संरक्षक श्री बनारसीलाल पांडे जी* ने कहा कि ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से केवल वाहन मालिक ही नहीं, बल्कि चालक, हमाल, कर्मचारी और हजारों परिवार जुड़े हुए हैं। किसी भी ऐसी व्यवस्था का असर सीधे इन लोगों की रोजी-रोटी पर पड़ता है। इसलिए परिवहन व्यवसाय को अनावश्यक दबाव से मुक्त रखना जरूरी है और सभी ट्रांसपोर्टरों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए।


 *एसोसिएशन के श्री नीरज बंसल जी* ने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति या एक संस्था की लड़ाई नहीं है, बल्कि ट्रांसपोर्टरों के सम्मान और स्वतंत्र रूप से व्यापार करने के अधिकार की बात है। छोटी गाड़ी हो या बड़ी गाड़ी, बस्तर लाइन से जुड़े सभी ट्रांसपोर्टर इस मुद्दे पर एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह से ट्रांसपोर्टरों को अलग-अलग करने की कोशिश सफल नहीं होगी...


*छत्तीसगढ़ परचून संघ* के महामंत्री के *श्री कमल गोलछा जी* ने भी ट्रांसपोर्टरों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि परचून परिवहन का व्यापार सामान्य एवं स्वतंत्र रूप से चलना चाहिए। किसी भी ट्रांसपोर्टर की गाड़ी को ब्लैकलिस्ट कर उसके व्यवसाय को रोकना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि व्यापार जगत और ट्रांसपोर्टर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और परिवहन व्यवस्था बाधित होने का असर सीधे व्यापार पर पड़ता है।


RGTOA और छत्तीसगढ़ परचून परिवहन संघ ने कहा कि ट्रांसपोर्टर किसी के साथ विवाद नहीं चाहते, लेकिन दबाव की कोई भी व्यवस्था स्वीकार नहीं की जाएगी। संगठन ने सभी ट्रांसपोर्टर भाइयों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि छोटे-बड़े सभी वाहन मालिक इस विषय पर साथ खड़े हैं।


“परिवहन स्वतंत्र है, स्वतंत्र रहेगा—व्यापार पहले की तरह चलेगा, किसी दबाव में नहीं।”


 *राजधानी गुड्स ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर एसोसिएशन (RGTOA)* , 

*छत्तीसगढ़ परचून संघ* एवं 

समस्त *बस्तर परचून पीड़ित ट्रांसपोर्टर*

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