सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में कांग्रेसियों का कालनेमि चेहरा उजागर, पूर्व विधायक चंद्रदेव राय पर उठे सवाल
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में कांग्रेसियों का कालनेमि चेहरा उजागर, पूर्व विधायक चंद्रदेव राय पर उठे सवाल
बिलाईगढ़। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला बनने का श्रेय बिलाईगढ़ विधानसभा के पूर्व विधायक चंद्रदेव राय एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा लिए जाने को लेकर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बिलाईगढ़ के विकास को लेकर कई बड़े वादे किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर जनता को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल सकीं। आरोप है कि आज भी बिलाईगढ़ क्षेत्र बिजली, सड़क और पानी जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है।
जिला गठन को लेकर भी उठाए सवाल
आरोप लगाया गया है कि जब सारंगढ़-बिलाईगढ़ को मिलाकर नया जिला बनाया गया था, उस समय पूर्व विधायक चंद्रदेव राय प्रभावशाली विधायक होने के साथ परिवहन विभाग के संसदीय सचिव भी थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंच से जिला कार्यालयों को दोनों क्षेत्रों में आधा-आधा करने की बात कही थी, लेकिन आरोप है कि बिलाईगढ़ को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिला।
विरोधियों का कहना है कि जिला गठन के बाद से ही बिलाईगढ़ के लोग अपनी समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनका आरोप है कि तत्कालीन सरकार और स्थानीय नेतृत्व द्वारा बिलाईगढ़ के हितों को प्राथमिकता नहीं दी गई।
इंदिरा मार्केट की दुकानों को तोड़ने का मामला
आरोपों में बिलाईगढ़ के हृदय स्थल इंदिरा मार्केट का मुद्दा भी शामिल है। आरोप है कि पूर्व विधायक के कार्यकाल में यहां बनी दर्जनों दुकानों को यह कहकर हटाया गया था कि उनकी जगह सुंदर और भव्य व्यापारीक परिसर का निर्माण कराया जाएगा। लेकिन आरोप लगाने वालों का कहना है कि लंबे समय बाद भी यह वादा पूरा नहीं हुआ।
विरोधियों का आरोप है कि दुकान हटाने के विरोध में आवाज उठाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई तक हुई और कुछ निर्दोष लोगों को जेल भेजे जाने का भी आरोप लगाया गया। इसी मुद्दे को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी फिर तेज हो गई है।
बस स्टॉपेज को लेकर भी सवाल
बिलाईगढ़ में रायपुर से रायगढ़ तथा बिलासपुर की ओर चलने वाली बसों के नियमित स्टॉपेज का मुद्दा भी उठाया गया है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि जब चंद्रदेव राय परिवहन विभाग के संसदीय सचिव थे और प्रदेश में उनकी पार्टी की सरकार थी, तब बिलाईगढ़ में बस स्टॉपेज शुरू कराने के लिए प्रभावी पहल की जा सकती थी।
विरोधियों का सवाल है कि उस समय यह मांग पूरी क्यों नहीं की गई और आज इसी मुद्दे को लेकर आंदोलन करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। उनका आरोप है कि वर्तमान में जनता की सहानुभूति हासिल करने के लिए आंदोलन किए जा रहे हैं।
बालपुर में आंदोलन को लेकर भी निशाना
पूर्व विधायक चंद्रदेव राय द्वारा बालपुर में धरना-प्रदर्शन किए जाने को लेकर भी राजनीतिक हमला बोला गया है। विरोधियों का आरोप है कि छोटे बच्चों को आंदोलन में शामिल कर राजनीति करना उचित नहीं है और बच्चों के भविष्य को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखा जाना चाहिए।
आरोप लगाने वालों ने कहा कि यदि वर्तमान विधायक या सरकार से कोई शिकायत है तो लोकतांत्रिक तरीके से संबंधित जनप्रतिनिधियों के समक्ष अपनी बात रखी जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि समस्या का समाधान स्थानीय स्तर पर संभव है तो आंदोलन की दिशा क्या होनी चाहिए।
सहकारी बैंक को लेकर भी विवाद
बिलाईगढ़ और पवनी में सहकारी बैंक खोलने के मुद्दे पर भी पूर्व विधायक चंद्रदेव राय की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि बैंक की दौड़ में पवनी का नाम पहले प्रमुखता से नहीं था, लेकिन राजनीतिक कारणों से पवनी का नाम प्रस्तावित कराया गया।
विरोधियों का दावा है कि दोनों स्थानों के बीच लगभग तीन किलोमीटर की दूरी होने के कारण एक साथ दोनों जगह बैंक खोलना संभव नहीं था। उनका आरोप है कि तत्कालीन विधायक के पास अपने कार्यकाल के दौरान इस दिशा में पहल करने का पर्याप्त समय था, लेकिन उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
“आज अपनी ही बोई फसल का परिणाम भुगत रही जनता”
राजनीतिक विरोधियों का कहना है कि आज पूर्व विधायक द्वारा जिन मुद्दों को लेकर आंदोलन और प्रदर्शन किए जा रहे हैं, उनमें से कई मुद्दों की नींव उनके ही कार्यकाल में पड़ी थी। उनका आरोप है कि जनता को उस समय किए गए वादों का जवाब आज तक नहीं मिला।
विरोधियों ने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और समय आने पर जनता अपने मत के माध्यम से जवाब देगी। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेताओं को आने वाले समय में अपने पुराने कार्यकाल और लिए गए फैसलों का राजनीतिक परिणाम भुगतना पड़ सकता है।


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